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बिरौल में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, निजी अस्पतालों व नर्सिंग होम पर छापेमारी में दो संस्थान सील, अल्ट्रासाउंड मशीन जब्त

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दरभंगा के बिरौल अनुमंडल में स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम ने निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम पर बड़ी छापेमारी की। इस दौरान दो अस्पताल सील किए गए, एक अल्ट्रासाउंड मशीन जब्त हुई और कई क्लीनिक बंद पाए गए।

बिरौल/आलम की खबर:दरभंगा जिले के बिरौल अनुमंडल क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और निजी चिकित्सा संस्थानों की वैधता की जांच को लेकर प्रशासन ने बड़ा अभियान चलाया। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम ने शुक्रवार को कई इलाकों में एक साथ छापेमारी करते हुए निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकों की गहन जांच की। इस कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा संचालकों के बीच हड़कंप की स्थिति देखी गई और कई जगहों पर संस्थान अचानक बंद कर दिए गए।

यह छापेमारी अभियान सुपौल बाजार, खोरागाछी रोड, उछटी रोड, पुराना थाना रोड और भन्था रोड सहित कई प्रमुख इलाकों में चलाया गया। टीम ने सबसे पहले खोरागाछी रोड स्थित एसएस अस्पताल में जांच शुरू की, जहां अस्पताल के दस्तावेज, चिकित्सा उपकरणों की स्थिति और उपचार व्यवस्था की बारीकी से समीक्षा की गई। जांच के दौरान अनियमितताएं सामने आने पर मौके पर मौजूद अधिकारियों ने अल्ट्रासाउंड मशीन को सील कर दिया। साथ ही अस्पताल के कर्मचारियों से विस्तृत पूछताछ भी की गई ताकि संचालन से जुड़े तथ्यों की पुष्टि की जा सके।

इसके बाद टीम जेके कॉलेज के समीप स्थित एक हड्डी अस्पताल पहुंची, जहां मरीजों का इलाज और ड्रेसिंग प्रक्रिया जारी थी। हालांकि निरीक्षण के दौरान अस्पताल प्रशासन द्वारा आवश्यक पंजीकरण, प्रशिक्षण प्रमाणपत्र और चिकित्सकीय मानकों से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। स्थिति को गंभीर मानते हुए प्रशासनिक टीम ने तत्काल प्रभाव से इस अस्पताल को सील करने की कार्रवाई की।

इसी क्रम में जांच दल जेके अस्पताल भी पहुंचा, लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही अस्पताल लगभग खाली पाया गया। अधिकांश मरीज और स्टाफ पहले ही परिसर छोड़ चुके थे। टीम ने मौके पर केवल सीमित गतिविधियां पाईं और पूरे परिसर की स्थिति का विस्तृत निरीक्षण किया। इस परिस्थिति ने जांच प्रक्रिया पर सवाल भी खड़े किए, क्योंकि अचानक संस्थान खाली पाया जाना संदिग्ध माना जा रहा है।

छापेमारी के दौरान कई अन्य निजी स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति भी सामने आई। 17 नंबर कोठीपुल-गंदौल सहरसा रोड स्थित जीवन धारा केयर सेंटर बंद मिला, जबकि उछटी रोड स्थित रंजना हेल्थ केयर में कोई भी चिकित्सक उपस्थित नहीं था। भन्था रोड पर स्थित एचएस मेमोरियल अस्पताल भी जांच टीम के पहुंचने से पहले बंद कर दिया गया था, जिससे कई संस्थानों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं।

पुराना थाना रोड स्थित एक अन्य निजी अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए मौजूद थे, लेकिन जांच के समय डॉक्टर अपने कक्ष में अनुपस्थित पाए गए। मरीजों को लंबे समय तक चिकित्सक के आने का इंतजार करना पड़ा, जिससे अस्पताल की सेवा व्यवस्था पर भी सवाल उठे।

जैसे ही छापेमारी की खबर क्षेत्र में फैली, सुपौल बाजार और आसपास के इलाकों में कई निजी क्लीनिक, नर्सिंग होम और जांच घरों में ताले लगने लगे। कई संचालकों ने आनन-फानन में अपने संस्थान बंद कर दिए और यहां तक कि कुछ जगहों पर बोर्ड भी हटा दिए गए। इससे यह स्पष्ट हुआ कि कई संस्थान प्रशासनिक मानकों को लेकर पहले से ही असुरक्षित स्थिति में संचालित हो रहे थे।

प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी है। बिना मानक, बिना पंजीकरण और बिना प्रशिक्षित स्टाफ के चल रहे संस्थानों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है ताकि मरीजों के जीवन के साथ किसी प्रकार का समझौता न हो।

अनुमंडलीय अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. योगेंद्र प्रसाद ने स्पष्ट कहा कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग लगातार ऐसे संस्थानों पर निगरानी रख रहा है जो नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। आगे भी यह अभियान जारी रहेगा और सभी निजी स्वास्थ्य संस्थानों को निर्धारित मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या अवैध संचालन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आने वाले समय में ऐसे अभियानों को और तेज किया जाएगा।

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